
लुडविग विट्गेन्स्टाइन एवं धर्म : एक अध्ययन - Ludwig Wittgenstein and Religion: A Study
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यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• लà¥à¤¡à¤µà¤¿à¤— विटà¥à¤™à¥à¤—ेमà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ (Ludwig Wittgenstein) के धारà¥à¤®à¤¿à¤• विशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ और धारà¥à¤®à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤·à¤¾ की उनकी विशिषà¥à¤Ÿ समडर का गहन à¤à¤µà¤‚ आलोचनातà¥à¤®à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करती है। विदङà¥à¤—ेनà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ का वरà¥à¤¶à¤¨ सामानà¥à¤¯ धरà¥à¤®à¤®à¥€à¤®à¤¾à¤‚सा से à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ है। वे धरà¥à¤® को किसी तरà¥à¤•संगत पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ या सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त के रूप में नहीं, बलà¥à¤•ि जीवन रूप (Form of Life। और à¤à¤¾à¤·à¤¾-खेल (Language Game) के रूप में देखते हैं। यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• इसी केंदà¥à¤°à¥€à¤¯ दृषà¥à¤Ÿà¤¿ की समालोचना करते हà¥à¤ यह बताने का पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ करती है कि धारà¥à¤®à¤¿à¤• विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ पर आधारित न होकर मनà¥à¤·à¥à¤¯ के वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°, संसà¥à¤•ृति और अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ में निहित होते हैं।Â
विगेनà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ के धारà¥à¤®à¤¿à¤• विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ विचारों के लिठकारà¥à¤¡ नेलà¥à¤¸à¤¨ ने जिस पर का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया वह है 'विटà¥à¤—ेनà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ फाइडेइसà¥à¤®'। जिसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° धारà¥à¤®à¤¿à¤• विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ पर नहीं बलà¥à¤•ि आसà¥à¤¥à¤¾ पर आधारित है। हालांकि उनके इस पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में कहीं कहीं रहसà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ की इालक तिखती है।
पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• का पहला à¤à¤¾à¤— विटà¥à¤—ेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ के Tractatus से लेकर Philosophical Investigations तक के बौदà¥à¤§à¤¿à¤• विकास की पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि देता है। दूसरा à¤à¤¾à¤— धारà¥à¤®à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤·à¤¾ के बारे में विटà¥à¤—ेनà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ के तरà¥à¤•ों की आलोचनातà¥à¤¯à¤• वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ करता है। तीसरा à¤à¤¾à¤— विटà¥à¤°à¥‹à¤¨à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ की धारà¥à¤®à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की समीकà¥à¤·à¤¾ करते हà¥à¤ यह वशनि का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करती है कि यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ वे पारंपरिक अरà¥à¤¥ में धारà¥à¤®à¤¿à¤• नहीं थे, फिर à¤à¥€ धरà¥à¤® के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गहरे समà¥à¤®à¤¾à¤¨ और संवेदनशीलता रखते थे। अंततः यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• इस पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ को केंदà¥à¤° में रखती है कि धारà¥à¤®à¤¿à¤• विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ को समà¤à¤¨à¥‡ का सबसे उपयà¥à¤•à¥à¤¤ तरीका कà¥à¤¯à¤¾ है तरà¥à¤•, अनà¥à¤à¤µ, à¤à¤¾à¤·à¤¾ या जीवन-रूप? यह समकालीन पाठकों के लिठविदà¥à¤°à¥à¤—नà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ को नठपà¥à¤°à¤•ाश में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करती है।
डॉ. पयोली संपà¥à¤°à¤¤à¤¿ बी. आर. à¤. विहार विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤•ोतà¥à¤¤à¤° दरà¥à¤¶à¤¨à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° विà¤à¤¾à¤— में सहायक पà¥à¤°à¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¿à¤•ा के रूप में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ हैं। वे à¤à¤². à¤à¤®, कॉलेज में सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• (गोलà¥à¤¡ मेडलिसà¥à¤Ÿ) à¤à¤µà¤‚ पी.जी. दरà¥à¤¶à¤¨à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° विà¤à¤¾à¤—, वाचा साहेच à¤à¥€à¤®à¤°à¤¾à¤µ अमà¥à¤¬à¥‡à¤¡à¤•र बिहार विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤•ोतà¥à¤¤à¤° (गोलà¥à¤¡ मेडलिसà¥à¤Ÿ) रही है। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में समनà¥à¤µà¤¯à¤•, पोसà¥à¤Ÿ गà¥à¤°à¥‡à¤œà¥à¤à¤Ÿ डिपà¥à¤²à¥‹à¤®à¤¾ इन योगिक साईस के रूप में à¤à¥€ अपना योगदान दे रही हैं। साथ ही विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कमेटियों तथा सासà¥à¤•ृतिक समिति, कà¥à¤²à¤—ीत समिति आदि की सदसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ हैं। इनके कई लेख अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ à¤à¤µà¤‚ राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° की पतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं में पà¥à¤°à¤•ाशित हो चà¥à¤•े है। इसके अतिरिकà¥à¤¤ वे शोध à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ (An International Referreed Research Journal) की समà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤• सलाहकार समिति में शामिल है।
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