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à¤à¤• सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ की आतà¥à¤®à¤•था गोमà¥à¤– से गंगासागरगहरी जीवन रेखा
यह किताब उन लोगों को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर लिखी गई है जो अपने जीवन में कà¤à¥€-न-कà¤à¥€ घर बार छोड़ सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ बनने की बात सोची तो हो लेकिन à¤à¤¸à¤¾ वे कà¤à¥€ कर नहीं पायें। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठनहीं होता कि वे सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ जीवन के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आकरà¥à¤·à¤£ महसूस करने लग गठहै। बलà¥à¤•ि वे अपने वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ के सामने छाठअंधकार में घà¥à¤Ÿà¤¨ महसूस करने लगते है। सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ के बारे में सोचते ही हमारे मन कई पà¥à¤°à¤•ार की कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾à¤à¤‚ उà¤à¤°à¤¨à¥‡ लगती है। à¤à¤• तो उन महान विà¤à¥‚तियों की होती है जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इतिहास याद रखता है, दूसरे उकà¥à¤¤à¤¿ को चरितारà¥à¤¥ करते हà¥à¤ लोग। पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• की शà¥à¤°à¥‚आत सनॠ1959 में किसी बाबा दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आयोजित किसी गाà¤à¤µ में समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने वाले à¤à¤• यजà¥à¤ž समारोह तथा उसका गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ वातावरण पर पड़ने वाले नाना पà¥à¤°à¤•ार के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को समà¤à¤¨à¥‡ के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ के साथ होता है, दूसरे अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ में संत विनोबा à¤à¤¾à¤µà¥‡ के नेतृतà¥à¤µ में 'सरà¥à¤µà¥‹à¤¦à¤¯' अधिवेशन वरà¥à¤£à¤¨ करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ है, तीसरे में सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ बनने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ दीकà¥à¤·à¤¾- करà¥à¤®à¤•ांड आदिका वरà¥à¤£à¤¨ है जिनसे मै गà¥à¤œà¤°à¤¾ हूं।
कृषà¥à¤£ गोपाल चौधरी जी की किताब सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आकरà¥à¤·à¤£, आगà¥à¤°à¤¹ और सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ में पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤ होने à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤¨à¤ƒ सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ से सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ गà¥à¤°à¤¹à¤£ करने यानी गृहसà¥à¤¥ आशà¥à¤°à¤® में लौट आने वाले परिवà¥à¤°à¤¾à¤œà¤• की "आतà¥à¤® कथा है। इनका बचपन और जवानी के बीच à¤à¤• दशक के फासले पर दो à¤à¤¸à¥€ घटनाà¤à¤‚ घटित होती है जो उनको बाद के वरà¥à¤·à¥‹à¤‚
में सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ की तरफ पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤ होने में उतà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤°à¤• का काम करती है। इनका गांव परसियां जिला शाहाबाद, आरा, बिहार इस मायने में à¤à¤• à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ गांव था कि वहां डंडी सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ सोमानंद सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ के रूप में à¤à¤• अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• अà¤à¤¿à¤à¤¾à¤µà¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ रूप से विराजमान रहते थे। यौवन की शà¥à¤°à¥‚आती दौर में ही संतों के संसरà¥à¤— à¤à¤µà¤‚ संवाद ने उनको यह पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤à¤¿ करा दी थी कि सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ का सही समय जवानी ही है। इनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कही गई पूरी कथा में गृहसà¥à¤¥ बनाम सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ के यà¥à¤—ातà¥à¤®à¤• विलोम को पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में लाया गया है। कà¥à¤¯à¤¾ गृहसà¥à¤¥ होना आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• आदरà¥à¤¶à¥‹ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ या सतà¥à¤¯ के अनà¥à¤µà¥‡à¤·à¤£ की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ को बाधित करते हैं।
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