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Motilal Banarasidas Publishing House
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मनुष्य के जीवन का मूल तत्व चेतना है, और ध्यान उस चेतना को जाग्रत करने की अद्भुत कला। ""मिलिट्री मेडिटेशन"" डॉ. सुबोध सिंह की एक ऐसी जीवनदायिनी कृति है, जिसमें ध्यान को मठों, मंदिरों और आश्रमों की सीमाओं से निकालकर जीवन के हर क्षेत्र तक पहुँचाने का संकल्प दृष्टिगोचर होता है।
यह पुस्तक बताती है कि ध्यान किसी वर्ग विशेष, पेशे या आयु तक सीमित नहीं - यह तो बालक की जिज्ञासा से लेकर सैनिक के साहस तक, हर व्यक्ति के भीतर की चेतना को प्रकाशित करने की साधना है।
आज के तीव्र गति, प्रतिस्पर्धा और तनावपूर्ण जीवन में यह पुस्तक / रचना व्यक्ति की आन्तरिक शांति और मानसिक संतुलन का सशक्त सेतु है। डॉ. सुबोध सिंह ने इसमें ध्यान को न केवल आध्यात्मिक अनुभव, बल्कि विज्ञान, मनोविज्ञान और व्यवहार के रूप में भी प्रस्तुत किया है।
इस पुस्तक का प्रमुख आधार है- ""ध्यान कोई पलायन नहीं, बल्कि जीवन के मध्य में सजग रहने की कला है।"" युद्धभूमि में जहाँ शरीर की नहीं, मन की दृढ़ता की परीक्षा होती है - वहाँ ध्यान सैनिक के लिए शौर्य और अनुशासन का कवच बनता है। वहीं बालको के लिए यह एकाग्रता का आधार, युवाओं के लिए आत्मविश्वास का दीपक, गृहस्थों के लिए समरसता का साधन और वृद्धों के लिए आंतरिक शांति का सहारा बनता है।
डॉ. सुबोध सिंह ने ध्यान की सूक्ष्म भारतीय परम्परा को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि से जोड़ते हुए इसे एक सार्वभौमिक जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत किया है। इसमें प्राणायाम, मानसिक एकाग्रता, ध्यान-ऊर्जा का विकास, और संतुलित चेतना के व्यावहारिक उपाय दिए गए हैं, जो प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ, संयमित और सजग जीवन की ओर प्रेरित करते हैं।
यह पुस्तक बताती है कि जब सैनिक ध्यान करता है, तो उसका संकल्प दृढ़ होता है; जब विद्यार्थी ध्यान करता है, तो उसकी एकाग्रता बढ़ती है; जब माता ध्यान करती है, तो उसका स्नेह प्रकाश बन जाता है; और जब वृद्ध ध्यान करता है, तो उसका मौन प्रार्थना बन जाता है।
मिलिट्री मेडिटेशन"" वास्तव में शौर्य और शांति का अद्वितीय संगम है जहाँ ध्यान, अनुशासन और सजगता एक साथ जीवन को दिशा देते हैं।
मिलिट्री मेडिटेशन"" - मन को स्थिर करने, जीवन को सशक्त करने और समाज को संवेदनशील बनाने की प्रेरणादायक यात्रा है।
Book Details:
Author: Dr. Subodh Singh
Publisher: Motilal Banarsidass Publishing House
Edition: 1st
Publication Year: 2026
Pages: 146
Language: Hindi
Size: 5.5" x 8.5"

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मनुष्य के जीवन का मूल तत्व चेतना है, और ध्यान उस चेतना को जाग्रत करने की अद्भुत कला। ""मिलिट्री मेडिटेशन"" डॉ. सुबोध सिंह की एक ऐसी जीवनदायिनी कृति है, जिसमें ध्यान को मठों, मंदिरों और आश्रमों की सीमाओं से निकालकर जीवन के हर क्षेत्र तक पहुँचाने का संकल्प दृष्टिगोचर होता है।
यह पुस्तक बताती है कि ध्यान किसी वर्ग विशेष, पेशे या आयु तक सीमित नहीं - यह तो बालक की जिज्ञासा से लेकर सैनिक के साहस तक, हर व्यक्ति के भीतर की चेतना को प्रकाशित करने की साधना है।
आज के तीव्र गति, प्रतिस्पर्धा और तनावपूर्ण जीवन में यह पुस्तक / रचना व्यक्ति की आन्तरिक शांति और मानसिक संतुलन का सशक्त सेतु है। डॉ. सुबोध सिंह ने इसमें ध्यान को न केवल आध्यात्मिक अनुभव, बल्कि विज्ञान, मनोविज्ञान और व्यवहार के रूप में भी प्रस्तुत किया है।
इस पुस्तक का प्रमुख आधार है- ""ध्यान कोई पलायन नहीं, बल्कि जीवन के मध्य में सजग रहने की कला है।"" युद्धभूमि में जहाँ शरीर की नहीं, मन की दृढ़ता की परीक्षा होती है - वहाँ ध्यान सैनिक के लिए शौर्य और अनुशासन का कवच बनता है। वहीं बालको के लिए यह एकाग्रता का आधार, युवाओं के लिए आत्मविश्वास का दीपक, गृहस्थों के लिए समरसता का साधन और वृद्धों के लिए आंतरिक शांति का सहारा बनता है।
डॉ. सुबोध सिंह ने ध्यान की सूक्ष्म भारतीय परम्परा को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि से जोड़ते हुए इसे एक सार्वभौमिक जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत किया है। इसमें प्राणायाम, मानसिक एकाग्रता, ध्यान-ऊर्जा का विकास, और संतुलित चेतना के व्यावहारिक उपाय दिए गए हैं, जो प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ, संयमित और सजग जीवन की ओर प्रेरित करते हैं।
यह पुस्तक बताती है कि जब सैनिक ध्यान करता है, तो उसका संकल्प दृढ़ होता है; जब विद्यार्थी ध्यान करता है, तो उसकी एकाग्रता बढ़ती है; जब माता ध्यान करती है, तो उसका स्नेह प्रकाश बन जाता है; और जब वृद्ध ध्यान करता है, तो उसका मौन प्रार्थना बन जाता है।
मिलिट्री मेडिटेशन"" वास्तव में शौर्य और शांति का अद्वितीय संगम है जहाँ ध्यान, अनुशासन और सजगता एक साथ जीवन को दिशा देते हैं।
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Author: Dr. Subodh Singh
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