ऋग्वेद-संहिता भावानुवाद: जन जन की भाषा में (Rigved-Sanhita Bhavanuvad: Jan Jan ki Bhasha Mein) | Indian product Online Shopping Store

ऋग्वेद-संहिता भावानुवाद: जन जन की भाषा में (Rigved-Sanhita Bhavanuvad: Jan Jan ki Bhasha Mein)

£11.66
SKU No. : 9789371003100
Motilal Banarasidas Publishing House
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Binding:Paperback
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ज्ञान-विज्ञान के अजस्त्र स्रोत वेद अपौरुषेय ग्रन्थ हैं जिन्हें ऋषियों ने गहन साधना द्वारा प्राप्त कर मानवता के उत्थान और जीवन की सर्वोत्कृष्ट उपलब्धियों को प्राप्त करने के लिये परम्परा द्वारा सहेज कर आनेवाली पीढ़ियों के लिये सुरक्षित रखा। वेदों की मूल भाषा संस्कृत होने से आम लोगों के लिये इनका ज्ञान प्रायः उनकी पहुँच के बाहर ही रहा। महर्षि दयानन्द सरस्वती और अन्य विद्वान लोगों ने वेदों पर भाष्य और उनका अनुवाद कर इन्हें सर्व-साधारण को उपलब्ध कराने का महत्तम प्रयास किया, फिर भी वेद का पठन-पाठन कुछ ही लोगों तक सीमित होकर रह गया। हरेक वक्त की अपनी एक भाषा-शैली होती है और वक्त के साथ प्राचीन साहित्य को उस वक्त की भाषा-शैली में प्रस्तुत करने की आवश्यकता बनी रहती है। यह 'ऋग्वेद-संहिता भावानुवाद, जन जन की भाषा में' उसी दिशा में उठाया गया एक कदम है जिसका उद्देश्य ऋग्वेद को जो कि चारों वेदों में प्रमुखतम है और अन्य तीनों वेदों का मुख्य आधार है, जिसमें सब पदार्थों की स्तुति होती है अर्थात् ईश्वर ने जिसमें सब पदार्थों के गुणों का प्रकाश किया है, उसके भावानुवाद को सरल, सहज और समसामयिक भाषा में साधारण जन तक पहुँचाना है। इस कार्य का मुख्य आधार परम श्रध्येय स्वामी दयानन्द सरस्वतीजी का ऋग्वेद का भाष्य है तथापि यथा आवश्यकता अन्य विद्वानों के अनुवादों का भी आश्रय लिया गया है। मेरी समझ में ऋग्वेद का अध्ययन लौकिक और परमार्थिक जीवन दोनों ही के लिये अत्यन्त उपयोगी है।


Book Details:

Author: Rajendra Kumar Gupta

Publisher: Motilal Banarsidass Publishing House

Edition: 1st

Publication Year: 2026

Pages: 775

Language: Hindi

Size: 7.25" x 9.5"

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