/Shri Shri Paratrishika

Product Details
"परात्रिंशिका" मूलरूप से कश्मीर के अद्वैत त्रिकदर्शन के मुख्य तन्त्रग्रन्थ "रुद्रयामलतन्त्र" से उद्धृत 35 श्लोकों का एक छोटा संग्रह है। यह संग्रह पश्यन्ती भूमिका पर उतर कर अपने ही बहिर्मुखीन शाक्तप्रसर का रहस्य समझने की कामना से शिष्य के रूप में प्रश्न पूछने वाली भगवती परभैरवी ‘पराभटरिका’ और पराभाव पर ही अवस्थित रहकर गुरु के रूप में उसके प्रश्न का समाधान प्रस्तुत करने वाले उत्तरदाता ‘परभैरव’ का पारस्परिक संवाद है। यह एक बृहत्काय शारदा मूल-पुस्ती है जिसका अंतिम भाग श्री परात्रिंशिका है। पूर्व भाग आचार्य अभिनव द्वारा रचित ‘श्री तन्त्रसार’ तन्त्रग्रन्थ है।
Customer Reviews
0.0 out of 5Based on 0 Reviews
0
0
0
0
0
0.0 out of 5
Based on 0 ReviewsNo reviews yet. Be the first to review this product!
More Products From Kashmir Shaivism
View AllCA$6.15CA$6.51-6%
लुडविग विट्गेन्स्टाइन एवं धर्म : एक अध्ययन - Ludwig Wittgenstein and Religion: A Study
Motilal Banarasidass
CA$6.15CA$6.51-6%
लुडविग विट्गेन्स्टाइन एवं धर्म : एक अध्ययन - Ludwig Wittgenstein and Religion: A Study
Motilal Banarasidass
New Arrivals
View AllCA$6.15CA$6.51-6%
लुडविग विट्गेन्स्टाइन एवं धर्म : एक अध्ययन - Ludwig Wittgenstein and Religion: A Study
Motilal Banarasidass
CA$6.15CA$6.51-6%
लुडविग विट्गेन्स्टाइन एवं धर्म : एक अध्ययन - Ludwig Wittgenstein and Religion: A Study
Motilal Banarasidass









